होई जै बैड़ा पार

**बरादरिया का होईजै बेड़ा पार**
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सुनी लो भाइयो और सुनी लो यार
काहें को आपसां में करी रै तकरार

चार दिनां की जिन्दड़ी सारी हैगड़ी
मिली जुली कै करिलौ यो दिन पार

काहीं का मसाला काहीं का आचार
जीवना में घोल़ी लो मीठा सा प्यार

यो काजे, टेहे सारे देखते हीं रहींजैं
एकता के सुत्रां में होईजो सारे सवार

दोगलिया बातां में काहीं नाहिं धरया
भड़वे कुच्चे छोडी कै होई जो न्यार

चोरियाँ चकारियाँ छोडी दो सारियाँ
आपसां में सारे थम करिलो एतबार

भांति भांति भांतू चाहे हम हैं कड़ीकै
आपणियां कौमां से करी रहै हैं प्यार

निंदियाँ चुगलियां बंद करिदो सारियाँ
सोने जैसे बणीजौ जिदा होवे सुनार

मनां में ठानी लौ सबकुछ ही होई जू
किदा न किदा होऊगड़ा म्हारा सुधार

कमी पैश़िया यो सारियां मुक्कीं जैं
विनती करते हैगड़े मालिका दरबार

सुखविंद्र हाथ जोड़ी करतां अरदासां
म्हारी बरादरिया का होईजै बेड़ा पार
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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