गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

होंठ तुम्हारा नाम !

आखिर आ ही है गया, उनका आज पयाम !
ढूढ़ रहे थे इश्क में, हम जो रोज मुकाम !!

बेसब्री से था हमे, उनका ये इंतज़ार !
थाम रखा तो आ गया,आज सब्र वो काम !!

जब चाहा तब कब मिला, रहे ताकते हाथ !
आज लबों के पास खुद, चलकर आये जाम !!

यहां छुपाकर कब छिपे ,दिल के गहरे राज !
बिना कहे ही ले रहे, होंठ तुम्हारा नाम !!

—सौरभ

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