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” है विकास में देर अभी ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

कविता

March 3, 2017

हरियाली सब और नहीं है ,
हरा भरा सब छोर नहीं है !
यहाँ प्रकृति जी भर देती ,
रूठा मौसम ठौर नहीं है !
बैलगाड़ी है ,बैलजोड़ी है –
खाते रूखा कोर अभी !!

जल संसाधन थोड़े थोड़े ,
हम तो सदा रहे निगोड़े !
भूमि उर्वर रही नहीं है ,
खर्च न्यून पाई पाई जोड़े !
अच्छी फसल दाम कम मिलते –
बिगड़ी फसल नुकसान तभी !!

पशुधन भी अब हाथ कहाँ ,
चारागाह ना बचे यहाँ !
राजनीति ने कुछ ना छोड़ा ,
नेताओं से सभी तवाँ !
भाग दौड़ है और परिश्रम –
किस्मत देती साथ कभी !!

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Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more

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