कविता · Reading time: 1 minute

*है क्या?*

*है क्या?*

खुरदरे पथ पर जो कभी चला न,,
वो क्या समझे राह पथरीली *है क्या?*,,

जिसने कभी जिंदगी मैं कुछ दिया न,,
वो क्या जाने जिंदादिली *है क्या?*,,

राह जिसकी ही सदा एकल रही हो,,
वो क्या चले संगदिली *है क्या?*,,

वक़्त को जिसने गुजारा हो रो तन्हा,,
वो क्या पता रहमदिली है *क्या?*,,

मनु मन बेचैन ही है उसके मिलन को,,
वो क्या समझे दरियादिली *है क्या?*,,
*🙏मानक लाल मनु🙏*

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