कविता · Reading time: 1 minute

है कोई …………

है कोई …………
भूखे को भोजन प्यासे को पानी पिला दे
बीमार को दवा और अच्छे को अच्छा बता दे
जो खुद को संपन्न दूसरों को बढ़िया बता दे
खुद की गलती पर खुद को सजा दे
है कोई ….
जो सच्ची अपनी पहचान बना दे
दुष्ट विचारों का नामोनिशान मिटा दे
अपनों को अपना बना दे
बुने हुए सपनो को हकीकत बना दे
है कोई ….
जो खुद को इंसान बना दे
इंसानियत जैसा ईमान दिखा दे
मेरी हाँ में हाँ मिला दे
अपने को छोटा अगले को बड़ा बता दे
झूट फरेब के साथ खुद को बेईमान बता दे
है कोई ….
जो पौंधे को पेड बना दे
तने को टहनी बना दे
कमज़ोर को सशक्त बना दे
लाचार को आदर्श बना दे
है कोई ….
बड़ा है कोई तो बड़ापन दिखा दे
गरीबों को कभी अमीरी दिखा दे
बिना झगडे के कोई व्यवसाय चला दे
बीते हुए लम्हों को कभी अच्छा बता दे
____________________________________ बृज

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