"हैरानी"

हसीँ गुलनाज़-ए-मन्ज़र, अभी भी, याद में क्यूँ है,
सिफ़त,अदबो-हुनर उसका,अभी भी ख़्याल मेँ क्यूँ है।

चला जाता हूँ मैं, मानिन्दे-अफ़सूँ, किसकी जानिब अब,
अजब सा ताल्लुक़, सरगोश सी, आवाज़ से क्यूँ है।

सुरुरे-निकहते-लबरेज़, दिलकश सी फ़ज़ाँ है क्यूँ,
सबा का शोख़पन, दोशीज़गी भी गुमान पे क्यूँ है।

मुहब होता हूँ मैं ये, किस फ़रिश्ते-नाज़ पर अब भी,
हसीँ पैकर कोई यूँ, क़ातिले-आमाल पे क्यूँ है।

गज़ब ढाने को अबरो-ख़म, लगी काफ़ी नहीं थीं क्या,
तबस्सुम का निशाना, फिर मेरी ही जान पे क्यूँ है।

मयस्सर हैँ जो मुझको तल्ख़ियाँ,सारे ज़माने की,
लबे-शीरीँ-ए-पिनहा, ज़हर ही फिर,प्यास मेँ क्यूँ है।

हैं आमादा कई साए, मुहीबाँ, सँग चलने को,
उरज-तौफ़ीक़, कोई हमसफ़र सा, साथ में क्यूँ है।

ज़रो-दौलत न है मुझपे, न ही हूँ क़स्र-ए-हासिल,पर,
किसी की नज़र, बस मेरे ज़मीरे-माल पे क्यूँ है।

अज़ाबोँ की है बस्ती, कुछ नक़ाबे-रु-ए-पोशीदा,
किसी की जुस्तजू मेँ, दिल मेरा, अरमान पे क्यूँ है।

बराहे-ज़ीस्त, हरसूँ तीरगी थी, इक बियाबाँ सी,
मिरे आगोशे-आमादा, मनव्वर-शाद ये क्यूँ है।

छुपा रक्खा था होठों से भी,अब तक राज़ जो,दिल ने,
मिरी चाहत का चर्चा, अब ज़ुबाँ-ए-आम पे क्यूँ है।

हुए हैराँ जो,आलम बेख़ुदी का, सर हुआ “आशा”,
अक़ीदा अब भी मुझको, ज़ीनते-नायाब पे क्यूँ है..!

गुलनाज़-ए-मन्ज़र # चमकते फूलों जैसा दृश्य,scene of sparkly flowers
सिफ़त # गुण, qualities
मानिन्दे-अफ़सूँ # जादू की तरह,as if a magic
जानिब # तरफ़, direction
सरगोश # फुसफुसाहट जैसी whispering
सुरुरे-निकहते-लबरेज़ # एक नशीली सुगंध से परिपूर्ण, full of intoxicating fragrance
सबा # प्रातःकाल की हल्की ठँडी, मन्द मन्द बहने वाली बयार, morning breeze
दोशीज़गी # कौमार्य,virginity
शादाब # प्रफुल्लित,cheerful
मुहब # तल्लीन,charmed
फ़रिश्ते-नाज़ # सौंदर्य से गर्वान्वित परी, a beautiful angel,full of pride
पैकर # सँरचना,शरीर,form,body etc.
क़ातिले-आमाल # जान ले लेने को तत्पर, adamant on the act of killing
अबरो-ख़म # (ख़ूबसूरत) कमान जैसी भौँहेँ (beautiful) arches of eyebrows
तबस्सुम # ख़ूबसूरत मुस्कान,a pleasant smile
मयस्सर # उपलब्ध, available
तल्ख़ियाँ # कड़वाहटेँ,bitternesses
लबे-शीरीँ-ए-पिनहा # मृदुल होठों मेँ छुपा, concealed in sweet lips
मुहीबाँ # डरावने,dreadful
उरज-तौफ़ीक़ # उत्साहवर्धन हेतु,to augment the courage
क़स्र-ए-हासिल #महल का मालिक in possession of a palace
ज़मीरे-माल # अन्तरात्मा रूपी सम्पत्ति, the wealth of conscience
अज़ाब # कष्ट, torment
नक़ाबे-रु-ए-पोशीदा # नक़ाब से चेहरा छुपाते लोग, people hiding their face behind veil
बराहे-ज़ीस्त # जीवन-पथ पर,on the path of life
तीरगी # अन्धकार,darkness
बियाबाँ # सुनसान,lonely
आगोशे-आमादा # गोद में बैठने को आतुर,ready to sit in the lap
मनव्वर-शाद # प्रसन्नतादायक प्रकाश,heartwarming light
बेख़ुदी # बेसुध होना,not in senses
अक़ीदा # भरोसा,faith
ज़ीनते-नायाब # अद्वितीय सौंदर्य, unsurpassed beauty

रचयिता-
Dr.Asha Kumar Rastogi
M.D.(Medicine),DTCD
Ex.Senior Consultant Physician,district hospital, Moradabad.
Presently working as Consultant Physician and Cardiologist,sri Dwarika hospital,near sbi Muhamdi,dist Lakhimpur kheri U.P. 262804 M.9415559964

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