हैप्पी न्यू ईयर नहीं हिन्दू नव वर्ष

हैप्पी न्यू ईयर नहीं हिन्दू नव वर्ष

हम भारतीयों को हमारी संस्कृति, सभ्यता विरासत में मिली है । हमारी हिन्दू संस्कृति, सभ्यता सर्वश्रेष्ठ है, विश्व के और भारत के अनेक महान विद्वानों ने इस सभ्यता को श्रेष्ठ माना है, लेकिन जहाँ तक मैं जानता हूँ हम हिन्दुओं को हम भारतीयों को ही अपनी सभ्यता पर गर्व नहीं है । हम एक जनवरी को हैप्पी न्यू ईयर मनाएँगे उस दिन उत्सव करेंगे, लेकिन क्या ये सही मायनों में सही है या नहीं ?
जिस दिन से हम हैप्पी न्यू ईयर की शुरुआत करते हैं क्या हमने कभी सोचा है कि इस दिन से शुभ नव वर्ष प्रारंभ हो रहा है कि नहीं । हमने कभी सोचा है कि उस दिन और उस दिन की पूर्व रात्रि मतलब इकतीस दिसंबर को कितना शोर शराबा होता है जो कि ध्वनि प्रदूषण का कारण है, कितने मूक प्राणी, पशु पक्षी शोर के कारण भयभीत हो जाते हैं, कुछ जो छोटे जीव जंतु हैं उनके लिए ये शोर असहनीय हो जाता है और उनकी मृत्यु हो जाती है । रातभर पार्टियाँ चलती हैं कितना फिजूलखर्च होता है । मनचले शराब पीकर, कितनी अश्लील हरकतें करते हैं जो कितनों की परेशानी का कारण बनती है ।कहीं कहीं पार्टियों में हंगामे के कारण विवाद भी बन जाता है और दंगे तक हो जाते हैं । और तुम इसे नव वर्ष का प्रारंभ मानते हो । जिसे तुम हैप्पी न्यू ईयर कहते हो वो तुम पर थोपा गया है जिसका बोझ तुम अब तक लादे हुए आ रहे हो । इस वक्त तो प्रकृति भी अनुकूल नहीं होती, पक्षी ठंड के कारण चहचहाना छोड़कर घोंसलों में रहते हैं । वृक्ष शून्य हो जाते हैं । चकवा – चकवी के विरह की पीड़ा बढ़ जाती है क्योंकि चकवा – चकवी श्राप के कारण रात्रि के अंधकार में बिछुड़ जाते हैं, चूँकि शिशिर ऋतु में दिन में भी कभी कभी अंधकार प्रतीत होता है इसी कारण उनकी विरह पीड़ा बढ़ जाती है । और हम इस समय को हैप्पी न्यू ईयर कहते हैं ।
कितने व्यक्ति तो ये भी नहीं जानते होंगे कि हिन्दू नव वर्ष भी होता है । हिन्दू नव वर्ष का प्रारंभ प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है, इसी दिन से चैत्र नवरात्रारंभ होता है और इसी दिन गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाता है । इस दिन के कुछ समय पहले होली का त्योहार मनाया जाता है जिससे जन-मन उत्साहित व आनंदित हो जाता है और इस दिन के कुछ समय पश्चात चैत्र शुक्ल नवमी को राम नवमी , चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को भगवान महावीर स्वामी जयंती, हनुमान जयंती मनाई जाती है जिससे वातावरण धार्मिक हो जाता है ।
प्रकृति भी इस नववर्ष का स्वागत ऋतुराज बसंत से करती है । इस समय ना अधिक ठंडी पड़ती है ना अधिक गर्मी । सम्पूर्ण पृथ्वी पर सुहाना मौसम हो जाता है । चिड़ियाँ चहचहाने लगती हैं, कोयल कुहू कुहू करने लगती है मानों इस नव वर्ष का स्वागत कर रहीं हो । सर्वत्र उल्लास छा जाता है ।
ऐसा हमारा हिन्दू नववर्ष है जिस पर हमें गर्व होना चाहिए । हमें हिन्दू नव वर्ष मनाना चाहिए ।

मेरे इस लेख का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है , मैंने केवल अपने विचार रखे हैं यदि किसी की भावनाओं को ठेस पहुँची हो तो मैं क्षमा चाहता हूँ । ये मेरे विचार हैं बांकी तो सभी स्वतंत्र हैं ।

– नवीन कुमार जैन

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