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हे सरस्वती माँ मेरी…..

CM Sharma

CM Sharma

कविता

February 1, 2017

हे सरस्वती करुणामयी अनुकंपा करो माँ मेरी….
ओज भरी मधुर हो वाणी सरस हो मेरी लेखनी….
ओज भरी मधुर हो वाणी सरस हो मेरी लेखनी….
हे सरस्वती करुणामयी अनुकंपा करो माँ मेरी….

कर्म हो निज स्वार्थ रहित परमार्थ मेरा लक्ष्य हो…
कर्म हो निज स्वार्थ रहित परमार्थ मेरा लक्ष्य हो…
उर मेरा प्रेम भरा रहे मन कमल हो मेरा भारती….
मन कमल हो मेरा भारती….
हे सरस्वती करुणामयी अनुकंपा करो माँ मेरी….

रहूँ ज्ञान पथ मैं अग्रसर तेरे नयनों से प्रकाश हो….
रहूँ ज्ञान पथ मैं अग्रसर तेरे नयनों से प्रकाश हो….
ना क्रोध भय उन्माद हो चन्दन बनूँ मैं परमेश्वरी…..
चन्दन बनूँ मैं परमेश्वरी…..
हे सरस्वती करुणामयी अनुकंपा करो माँ मेरी….

करून हाथ जोड़ मैं वंदना मुझे दम्भ ना ही द्वेष हो…
करून हाथ जोड़ मैं वंदना मुझे दम्भ ना ही द्वेष हो…
‘चन्दर’ की तुझ से ही प्रीत हो ध्यान तेरा वीणावादिनी…..
हो ध्यान तेरा वीणावादिनी…..
हे सरस्वती करुणामयी…अनुकंपा करो माँ मेरी….

माँ शारदे हंसवाहिनी माँ भारती भुवनेश्वरी…..
तिमिरहारिणी वाघीश्वरी हे सरस्वती माँ मेरी….
हे सरस्वती माँ मेरी……हे सरस्वती माँ मेरी.
\
/सी.एम्. शर्मा

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Author
CM Sharma
उठे जो भाव अंतस में समझने की कोशिश करता हूँ... लिखता हूँ कही मन की पर औरों की भी सुनता हूँ.....
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