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हे राम

guru saxena

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कविता

August 30, 2017

हे राम

साधू सन्यासी वा बाबा त्यागी तपसी तीर्थ समान
दर्शन कर चरणों में लागो मिले तुरत ही पुण्य महान
मान्यतायें हैं यही पुरातन हम सब माने जाते हैं
पर कुछ पापी नाम साधुओं का बदनाम कराते हैं
ऊपर से मीठे लगते हैं भीतर से होते हैं नीम
इसी कड़ी में आए सामने सिरसा वाले राम रहीम

लाखों जनमानस में जिनका श्रद्धा भक्ति भाव बढ़ा
अनाचार से दुराचार से स्वयं पाप का भरा घड़ा
रामपाल या आसाराम हों राम रहीम भले हो नाम
राम सभी में जुड़ा देश का क्या होगा आगे हे राम
हुई न्याय की जीत अंत में कपट छिपा ना काहू से
कालनेमि रावण से साधु बने देवता राहु से
साधू संन्यासी बाबाओ भले ज्ञान जैसा दे लो
भोली भाली इस जनता की भावनाओं से मत खेलो.

गुरु सक्सेना नरसिंहपुर मध्य प्रदेश

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guru saxena
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