Jun 27, 2020 · कविता
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~~{{हे मालिक}}~~

हे मालिक,थाम ले मेरे मन की डोर,बना रहूं इंसान ही न बनु कोई चोर।

क्रोध ईष्या से दूर रख,हो सच्चा मन साफ,
पाप के मार्ग से दूर रहूं,हो गलती अनजाने में तो करना माफ।

चला अंधकार का दौर जो उसमें भी रोशन रखना,गिरूं चाहे बार बार दे आशीर्वाद पूरा करूँ हर सपना।

इंसान हूँ इंसानियत पथ पर चलूं,ना रखूं कोई रंग भेद,कर्म धर्म की ही पूजा करूँ करो कृपा त्रिदेव।

मात्र पिता पूजनीय हैं रहे सदा मन में सेवा भाव,हो कठिनाई कितनी भी रहें सब भाई बंदु साथ।

सखा धर्म भी निभता रहे खुश रहें सब मित्र गुणवान,धरती पर ही चले कदम चाहे उड़ता रहे आसमान में नाम।

देशहित सर्वप्रिय हो चाहे मुश्किल मे हो जान,सांस चाहे निकल जाये ना आये भारत पर आँच।

एक रहे मेरा वतन ना हो कोई खींचतान,हिन्दू मुस्लिम सब एक रहे,ना हो मजहब की राजनीति एक रहे हिंदुस्तान।

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Aman 6.1
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नसीब की क्या बात हौंसले बुलंद रखिये, दिल तो क्या है बहक जाता है,इरादे अक्लमंद... View full profile
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