गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

“हे बाँकेबिहारी” तुझसे मिलने आयी हूँ ।

“हे बाँकेबिहारी” तुझसे मिलने आयी हूँ ।
“हे मुरारि” मुरली की धुन सुनने आयी हूँ ।
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गोकुल, वृंदावन में तेरी लीला है अंकित
उस लीला को नैनों में समेटने आयी हूँ।
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वश में नहीं कालचक्र, विवश है मानव
मैं भी अपनी विवशता कहने आयी हूँ ।
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नि:सक्त में शक्ति का संचार करते तुम
उस शक्ति का एहसास जानने आयी हूँ ।
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गुजर गई जिंदगी,जीवन को समझने में
तुझसे ही जीवन का सार पूछने आयी हूँ।
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अज्ञानी में ज्ञान का प्रकाश भर देते तुम
तुझसे ज्ञान की ज्योति मै भी लेने आयी हूँ।
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राथा के प्रेम और मीरा के वैराग्य में हो तुम
ऐसे संगम को आत्मसात करने आयी हूँ ।
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तेरे भक्त नाम लेकर श्याममय हैं हो जाते
संसार से निकल तुझमें ही डूबने आयी हूँ।
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दर्शन देते हो तुम उसे, चाहते हो तुम जिसे
दर्शनाभिलाषी हूँ, दिव्य दृष्टि माँगने आयी हूँ।
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विलीन कर लेते अपने में शरणागत को तुम
शरण में तेरी तुझमें ही विलय होने आयी हूँ।
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ले लो अपनी शरण में “पूनम” को ” हे कृष्णा ”
छल का है संसार भवसागर पार पाने आयी हूँ।
@पूनम झा। कोटा, राजस्थान
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