कविता · Reading time: 1 minute

हे प्रभु

हमने भी जुल्म कम नही किये
फायदे को दोहन प्रकर्ति का किया
जाने अनजाने हमसे भूल तो हुई
हे ईश्वर रहम करो अभी तो
साँसे बाक़ी थी बची,
उसकी जो था अस्पताल में पड़ा
पर न जाने क्यो हवा नहीं मिली
राजनीति के चक्कर मे मरीज
की तो हवा ही निकल पड़ी
हमने भी जुल्म कम नही किये
फायदे को दोहन प्रकर्ति का किया
हवा पर भी देखो खेल राजनीति का
आज हमने कहने को तो
तरक्की इतनी कर ली और
मौत आक्सीजन की कमी के
चलते ही होने लगी
हमने भी जुल्म कम नही किये
फायदे को दोहन प्रकर्ति का किया
डॉ मंजु सैनी
गाजियाबाद

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पुस्तकालयाध्यक्ष ग़ाज़ियाबाद में पिछले 22 वर्षों से पब्लिक स्कूल में कार्यरत। लेखन- साहित्य रचना एवं अनेक समाचार पत्रों में लेख,कविताएं प्रकाशित कृतियां- 1-काव्यमंजूषा 2-मातृशक्ति 3-शब्दोत्सव 4-महापुरुष 5-काव्य शब्दलहर 6-अम्बेडकर जीवन…
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