कविता · Reading time: 1 minute

हे जमाने तू यह तो बता – शेर

हे जमाने तू यह तो बता, आखिर तेरी चाहत क्या है।
नवनीत हो रहे अनुसंधान, फिर भी मानव आहत क्यों है।
छूता रहे तू नई नई ऊंचाइयां ,हम खुश होते रहेंगे।
इतना जरूर बता देना, जीवन में राहत कहां कहां है।।
राजेश व्यास अनुनय

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रग रग में मानवता बहती। हरदम मुझसे कहती रहती। दे जाऊं कुछ और ,जमाने तुझको, काव्य धारा मेरी ,ऐसी बहती ।। राजेश व्यास "अनुनय"
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