कविता · Reading time: 1 minute

“हूँ एक कहानी”

हूँ एक कहानी,
थोडी जानी,
थोडी पहचानी ,
पढ सको तो पढ लो ,
नहीं कोइ अनजानी,
हूँ एक कहानी.
शब्दों में सनी हूँ ,
भावों में सिमटी हूँ ,
लेखनी की पीडा से उपजी हूँ ,
अक्षर -अक्षर घोल कर उमडी हूँ ,
कागज़ -कागज़ पैदल चली हूँ ,
मगर नहीं की मनमानी,
हूँ एक कहानी,
थोडी जानी ,
थोडी पहचानी.

…निधि…

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