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तेरे हुसन का जादू(गज़ल)

Mandeep Kumar

Mandeep Kumar

गज़ल/गीतिका

September 22, 2016

तेरे हुसन का जादू/मंदीप

तेरा हुसन का जादू मुझ में समाता जाये,
जहाँ जहाँ मै जाऊ हर जगह मुझे तू ही नजर आये।

रूप बेमिसाल जैसे हो शायर का ख्वाब,
देखे ले जो एक बार फिर कुछ नजर ना आये।

चाल तेरी जैसे लरजती टहनी,
हवा का जोका तूझे छूना चाहे।

आँखे ऐसी जैसे चन्द्रमा की सुनहरी किरणे,
देख तेरे रूप का योवन मन शितल हो जाये।

कमर पर लम्बे केश जैसे हो अमर बेल,
देख तेरे हुसन को ये समा बंद जाये।

“मंदीप” रहना बच कर उस रूप की रानी से,
उस की आँखो के तीर तुम पर न चल जाय।

मंदीपसाई

Author
Mandeep Kumar
नाम-मंदीप कुमार जन्म-10/2/1993 रूचि-लिखने और पढ़ाने में रूचि है। sirmandeepkumarsingh@gmail.com Twitter-@sirmandeepkuma2 हर बार अच्छा लिखने की कोशिस करता हूँ। और रही बात हम तो अपना दर्द लिखते है।मेरा समदिल मेरे से खुश है तो मेरी रचना उस के दिल का... Read more
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