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हुनर

गुणवत्ता के इस युग में
स्वयं को कुसमायोजित होता देख
उसने चरण-वन्दना के
अति-प्राचीन कौशल का प्रयोग कर
सारे फिज़ूल कार्य करने के
अपने समस्त इच्छाओं
की पूर्ति कर ली।

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NAVNEET KUMAR SINGH
NAVNEET KUMAR SINGH
3 Posts · 646 Views
कविता मेरी अभिव्यक्ति है... लेकिन मैं कवि नहीं...!!!