हुआ दर्द से प्यार

*हुआ दर्द से प्यार*
————————
तुम्हीं बताओ
कैसे तोड़ूँ
किये हुए अनुबंध ?

आँखें खोलीं ,
मिली पाॅव को
दलदल की सौगात,
सीख लिया
तब से नयनों ने
जगना सारी रात ,
पीर महकने लगी
उठी आँसू से
मधुर सुगंध ।

पथरीली राहें
पाॅवों में पड़ी
अनेकों ठेक,
संघर्षों का
साॅझा चूल्हा
रहा उन्हें था सेक,
जुड़ा पसीने का
पीड़ा से
मिसरी सा संबंध ।

साथ चले फिर
गये छोड़कर
नदिया के मॅझधार,
जैसे-तैसे
बाहर आये
बैठे हैं इस पार,
अब कुछ झुके
हुए से लगते
तने-तने स्कंध ।

और वज़न कुछ
बढ़ा शीश पर
लेता दर्द हिलोर,
कितनी दूर
और रजनी से
होगी सुंदर भोर ,
साॅसें थोड़ी
इनी-गिनी सी
टूटेगा फिर बंध ।

साथ पुराना
दर्द लगे अब
अपना मुझको यार,
टीस उठे तो
लगता उसने
जतलाया है प्यार,
अंत समय तक
साथ निभेगा
अनुपम किया प्रबंध ।
*****
-महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा ।
***

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