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हुंकार

dr. pratibha prakash

dr. pratibha prakash

मुक्तक

August 4, 2016

कई छिपे गद्दार कन्हैया से घर में
कई ज़ाकिर कई मीर है
कहीँ सत्ता लोलुप आँखों में लालच की दिखती लकीर है
तक्षशिला को खो दिया कुछ जे.एन.उ.के आकाओं ने
किंतु अब भी चेतक भाला राणा का औ पृथ्वी के तीर है

ऐ पाक चीन है तुम्हे चुनौती
ज़न्नत मेरी कश्मीर है
लाख करो कोशिश मिल तुम दोनों
नहीं हरे द्रौपदी चीर है
है रक्त उबलता अब्दुल हमीद का सीमा पर
हर योद्धा भारत का भरी तुम पर,हर हुंकार बनी शूरवीर है

सादर भेंट

Author
dr. pratibha prakash
Dr.pratibha d/ sri vedprakash D.o.b.8june 1977,aliganj,etah,u.p. M.A.geo.Socio. Ph.d. geography.पिता से काव्य रूचि विरासत में प्राप्त हुई ,बाद में हिन्दी प्रेम संस्कृति से लगाव समाजिक विकृतियों आधुनिक अंधानुकरण ने साहित्य की और प्रेरित किया ।उस सर्वोच्च शक्ति जसे ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु... Read more
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