हीरा

टूट कर निकला वह
खदान से
फिर भी वह हीरा था
क़ीमत खुद की
न वह जानता
खुद ही से
अनजान था
पाया उसने कई दर्द
हीरे बनने के सफर में
कांच के टुकड़ों में
हीरा खो न जाये कभी
काँच के ढेर में
हीरा काँच न बन जाये कंही
ध्यान करे
ध्यान रहे
आखिर तुम भी तो
एक हीरा हो…

आनंदश्री

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