कविता · Reading time: 1 minute

हिम्मत

हिम्मत नही है
सच का सामना करने का
तो मत उतारो मैदान में

हिम्मत नहीं है
डर का सामना करने का
तो घर से मत निकलो

हिम्मत नहीं है
दान देने की
तो दानवीर मत कहलाओ

हिम्मत नहीं है
सफलता की ऊंचाईयों
को छूने की
तो छलांग मत लगाओ
और अगर

हिम्मत नहीं है
सच और कड़वा लिखने की तो
“मत लिखो”
कम से कम
समाज और देश को
गुमराह तो मत करो

स्वलिखित लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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लेखन एक साधना है विगत 40 वर्ष से बाल्यावस्था से होते हुए आज लेखन चरम पर है । यूनियन बैंक मे कार्यरत के दौरान बैंक के मैगज़ीन, भारतीय रिजर्व बैक…
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