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हिन्दी जन की बोली है (गीत)

suresh chand

suresh chand

गीत

August 28, 2016

हिन्दी जन की बोली है
हम सब की हमजोली है

खेत और खलिहान की बातें
अपने घर संसार की बातें
उत्तर-दक्षिण फर्क मिटाती
करती केवल प्यार की बातें ​

हर भाषा की सगी बहिनिया
यह सबकी मुँह बोली है

हिन्दी है पहचान हमारी
हमको दिलो जान सी प्यारी
हिन्दी अपनी माँ सी न्यारी
हिन्दी है अभिमान हमारी

हिन्दी अपने देश की धड़कन
अपने दिल की बोली है

आओ मिलकर ‘प्यार’ लिख दें
मन की उजली दीवारों पे
पानी का छींटा दे मारें
नफ़रत के जलते अंगारों पे

यही भावना घर-घर बाँटें
हिन्दी सखी-सहेली है

Author
suresh chand
जन्म -12 जुलाई 1972 को ग्राम व पो. जंगल चवँरी, थाना खोराबार, जिला-गोरखपुर (उ.प्र.) में । शिक्षा- एम.ए. (हिन्दी) तथा एल.एल.बी.। बाँसुरी एवं तबला से संगीत प्रभाकर। प्रथम काव्य संग्रह 'हम उन्हें अच्छे नहीं लगते' वर्ष 2010 में प्रकाशित। संप्रतिः... Read more
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