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हिंदी

Santosh Khanna

Santosh Khanna

कविता

September 14, 2017

हिंदी

हिंदी भारत माँ की बोली
माँ के दूध -सी मिश्री घोली
उसके सब हैं,वह है सबकी
जैसे रिश्ता दामन-चोली

हिंदी है हर मुख की शोभा
ह्रदय से हृदय का सेतु
वर्तमान की आँख का सपना
भावी आशाओ का केतु

महल,चौबारे या हो खोली
हिंदी भारत माँ की बोली

अपने से पहचान कराती
अपनों को समीप ले आती
युग युग की पहचान है साथी
तेरी मेरी सब की थाती

नदियों में ज्यों गंगा धौली
हिंदी भारत माँ की बोली

राष्ट्र की माला का मोती
अंधकार में जलती ज्योति
संस्कृत-सुता,बहु-भगनी वह
एकता सुर के सुमन पिरोती

हर भाषा की चन्दन रौली
हिंदी भारत माँ की बोली

बने न यह विवाद की भाषा
यह तो है संवाद् की भाषा
क्रांति और सुधार की भाषा
भक्ति और प्यार की भाषा

देश देश की माँ मुँहबोली
हिंदी भारत माँ की बोली
उसके सब हैं वह है सब की
जैसा रिश्ता दामन चोली ।
( साक्षी काव्य संग्रह से )

Author
Santosh Khanna
Poet, story,novel and drama writer Editor-in-Chief, 'Mahila Vidhi Bharati' a bilingual (Hindi -English)quarterly law journal
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