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satguru premi

satguru premi

घनाक्षरी

January 11, 2018

सुंदर सरल शब्द स्वच्छ शशि रश्मि के से
सारे सरगम के स्वरों को जो संवारती।
शुद्ध सुरसरि के समान सरसर बहे
सरस सराहनीय शारद सुधारती।
परम पुनीत पुरइंन के पराग जैसी
प्यारी प्यारी पारस सी प्रेम को पखारती।
भारतीय भूमि से भई थी भाषा भरपाई
भारी भनडार से भरी है भाषा भारती।।

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Author
satguru premi
मैं सतगुरु प्रेमी बेसिक शिक्षा परिषद् द्वारा अध्यापक हूँ, गीत,गजल,छन्द और कविताएँ लिखने का प्रयास करता हूँ,पत्र,पत्रिकाओ में मेरी रचनाएँ प्रकाशित होती रहतीं हैं , सारंधा की आन, प्रेमी विरह, छाया ' प्रकाशित कृतियाँ हैं।
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