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हिंदी दिवस पे हिंदी घुट-घुट के रो रही है

meenakshi bhasin

meenakshi bhasin

कविता

September 14, 2017

हिंदी दिवस पे आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं
पर मुझे तो ऐसा लगता है कि हिंदी हमसे कुछ कह रही है—–

हिंदी दिवस पे हिंदी घुट-घुट के रो रही है,
बच्चों के रहते मां की क्या हालत हो रही है

दुनिया में जब थे तुम आए, मुझ में ही तो
की थी तुमने प्रथम वो अभिव्यक्ति,
विचारों की थी मैं वाहिनी, ख्वाबों का थी मैं ठिकाना
मन को बोलने की मैने ही दी थी शक्ति,
अब जो कुछ तुम बन गए हो
इंग्लिश से चिपक गए हो,
बुद्धि को दिया जिसने पोषण
उसी पे ताने कस रहे हो,
हिंदी दिवस पे चाहे कई प्रतियोगिताएं चल पड़ी हैं
मानसिकता में तो इससे आई न कोई कमी है,
हिंदी दिवस पे हिंदी यह शिकायत कर रही है
हिंदुस्तान में आखिर क्यों हिंदी सिसक रही है–

क्यों आज अपनी ही मातृ-भूमि में जन्म लेकर
भी अपनी भाषा में काम करने को चाहिए हमें प्रोत्साहन,
इनाम दोगे तो काम करेगें, न दोगे तो दे देंगे टेंशन,
कई साल बीत गए यारों अब तो न बनाओ बहाने
कुछ मौलिकता की धुन बजाओ, छोड़ो विदेशी धुनों पर नाच-गाने
अपनाओगे अपनी भाषा तो कुछ नया सा कर पाओगे
वर्ना जीवन भर दूजे की लिखावट को कॉपी ही करते जाओगे,
हिंदी दिवस पे हिंदी फरियाद सी कर रही है
अपना लो राजभाषा हिंदी, देश की प्रगति की भी यही रजा है—

मीनाक्षी भसीन© 14-09-17सर्वाधिकार सुरक्षित

Author
meenakshi bhasin
मेरा नाम मीनाक्षी भसीन है और मैं पेशे से एक अनुवादक हूं। दिल्ली के एक सरकारी कार्यालय में काम करते हुए मुझे करीब सात वर्ष हो चुके हैं। मुझे लिखने का बहुत शौंक है और शायद इसलिए मैं अपना काम... Read more
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