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हिंदी गजल/गीतिका

manan singh

manan singh

गज़ल/गीतिका

October 18, 2016

#गीतिका#
***
टूटता रहता घरौंदा फिर बनाना चाहिये
जोड़कर कड़ियाँ जरा-सा गुनगुनाना चाहिये।1

जिंदगी से दर्द का बंधन बड़ा मशहूर है
जब समय थोड़ा मिले तो मुस्कुराना चाहिये।2

तीर ये कबके सँजोये चल रहे हैं आजतक
बात पहले की भुला नजदीक आना चाहिये।3

आदमी को आदमी के दर्द का अहसास हो
बस हवा ऐसी बहा गंगा नहाना चाहिये।4

मिल रहीं नजरें यहाँ परवान पन चढ़ता नहीं
आपके दिल में जरा मुझको ठिकाना चाहिये।5

फूल छितराये नहीं ऐसी करूँ मैं कामना
पंखुड़ी का मोल घर-घर को बताना चाहिये।6

नाव है मझधार में पर कूल कितनी दूर है?
अब पलक झपके नहीं हिम्मत दिखाना चाहिये।7
@मनन

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Author
manan singh
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