गीत · Reading time: 1 minute

हिंदी अपनी मात समान

हिंदी अपनी मात समान
हिंदी है भारत की शान

सरल शब्द हैं सरल व्याकरण
सिखलाती ये हमें आचरण
संस्कारों का देती ज्ञान
हिंदी भाषा मात समान

संस्कृत की है प्यारी बहना
अलंकार का पहने गहना
सजता इससे हिंदुस्तान
हिंदी भाषा मात समान

अभी उपेक्षित घर में अपने
देखा करती है ये सपने
पाएगी इक दिन पहचान
हिंदी भाषा मात समान

इसे जगत ने भी अपनाया
प्यार हमारा भी अब पाया
होगा जग में नाम महान
हिंदी भाषा मात समान

हिंदी हमसे हिंदी से हम
सजे स्वरों की इससे सरगम
हिंदी से है हिंदुस्तान

हिंदीमय जब होगा जीवन
हिंदुस्तानी होगा हर मन
देंगे सब पूरा सम्मान
हिंदी भाषा मात समान
14-09-2021
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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डॉ अर्चना गुप्ता (Founder,Sahityapedia) "मेरी तो है लेखनी, मेरे दिल का साज इसकी मेरे बाद भी, गूँजेगी आवाज" माता- श्रीमती निर्मला अग्रवाल पिता- स्मृति शेष डॉ राजकुमार अग्रवाल शिक्षा-एम०एस०सी०(भौतिक शास्त्र),…
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