हास्य -व्यंग्य कविता - कुत्ते की तिरछी दुम

कुत्ते की तिरछी दुम
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पाँच वर्ष के वाद हैं आये नेता पोपटराम ,
सम्पत्ति और तोंद बढा ली करि करि खोटे काम ।
करि प्रणाम बोले अबकी हम को देना वोट ,
यदि हम अबकी बने विधायक हर जेब में होगा नोट ।
खुशहाली घर घर में होगी सड़क बिजली पानी ,
शिक्षितों को बेरोज़गारी भत्ता सुखी होगी जिन्दगानी ।
मुफ्त मोबाइल फोन मिलेगा कृषक ऋण होंगे माँफ ,
जो जो तुमको कष्ट मिले हैं सब हो जायेंगे साफ ।
रसोई गैस मुफ्त मिलेगी कन्याओं को मिलेगा धन ,
हर बेटी की होगी शादी चाहे हो वो निर्धन ।
जीवन के सन्ताप मिटेंगे ऐसा हमारा वादा ,
सबसे अच्छी सेवा करेंगे ऐसा हमारा इरादा ।
हाथी हाथ कमल साईकिल को याद न रखना तुम ,
हमारा चिह्न याद रखना ‘ कुत्ते की तिरछी दुम’ ।
डाँ तेज स्वरूप भारद्वाज

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