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हास्य-कविता :हद हो गई………

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कविता

December 23, 2016

सपनों की दुनिया में गुलाब खिलाए बैठे हैं लोग।
अपने ही घर में आग लगाए बैठे हैं लोग।
इस कदर बेशर्म हैं अपनी घिनौनी हरक़तों से,
पैसे के चक्कर में बेटी को दांव पर लगाए बैठे हैं लोग।। *****************************
सब रिश्ते-नाते झुलसते जा रहे हैं बेशर्मी की आग में।
उपासना सिसकियाँ ले रही है वासना खड़ी है शाद में।
गुरु-दक्षिणा में चेलियां,गुरुओं से शादी रचा रही हैं।
मैडम जी आजकल शिष्यों पर प्रेम-सुधा बरसा रही हैं।
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अखबार के फ़्रंट पेज़ पर साधु लड़की लेकर फ़रार है।
यह सुनकर माँ-बाप को गर्मी में सर्दी का बुख़ार है।
पर हद पार कर बेशर्मी की बाप ने सोचा ख़ुशी से। अच्छा हुआ शादी के खर्चे से बचने का शुभ विचार है।
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पैसे के चक्कर में अपनों को भुला देते हैं लोग।
स्वार्थ के वशीभूत हो ठोकर लगा देते हैं लोग।
सुनलो! इस संसार में बेशर्मों की पूजा होती है।
सीधे-साधों को खड़े-खड़े चूना लगा देते हैं लोग।
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कुछ लोग शरमशार हैं तो देश का क्या होगा।
खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदलता सुना होगा।
ऐसी हवाएं चल रही हैं जिनमें बेशर्मी की बू आती है।
ऊँट किस करवट बैठेगा”प्रीतम”तुझे भी पता होगा।
राधेश्याम बंगालिया “प्रीतम”कृत
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