कविता · Reading time: 1 minute

हालात

मैं आशुफ्ता हो गया हूँ
जाने ये कैसे हो गया।
नाग सा अब मैं तड़पता,
मणि है मेरा खो गया।
किस इल्लत की ऐ खुदा,
तुम ने दी मुझको ये सजा।
गम है मेरी जिंदगी में,
खुशियों को दे दी है रजा।
मैंने इबादत खुब किया,
तुम ने दिया मुझे इब्तिला।
इब्न हूँ तेरा खुदा मैं ,
तुम ने किया इन्साफ क्या।
तोड़ कर के ये कफक
ये आत्मा आजाद कर दे।
या फिर खुदा उस बावरी को “ओम
सिंह” के साथ कर दे।

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