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” हालात नहीं बदले हैं ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

कविता

January 14, 2017

सीमा पर वही तनातनी ,
संकट के बादल गहरे !
छद्मयुद्ध दुश्मन करता ,
कितने बैठायें पहरे !
आतंकी सदमे में थोड़े –
लेकिन सम्भले सम्भले हैं !!

भारत विरोध के नारे हैं ,
बदले की आवाजें उठती !
काश्मीर दुखती रग जानो ,
हैं साँसे वहां अटकती !
सेना,सत्ता,आतंकी के –
ख़्वाब वही रुपहले हैं !!

भीतरघात यहाँ होनी है ,
खार खाये बैठा दुश्मन !
यहाँ वहाँ मोर्चे साधे हैं ,
फैलाये बैठा है फन !
विषदंत तोड़ने को आतुर –
करना हमको हमले हैं !!

धुंध धुंआ है गोलीबारी ,
हाथों में हैं हथगोले !
कितना कब तक धीर धरे ,
अब दिमाग में हैं शोले !
तुम्हे जीत का छोर मिले ना –
फिर नहले पर दहले हैं !!

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
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