हालाते वतन

जुल्म की दुनिया.सब खौफ है.सब खौफ है….रहनुमा जो बन गया .रहगुजर वो और है…….कल तक सम्हाला था जिन्होने वतन की आबरू …घर की आबरू बेच रहे वो नौजवॉ अब बात ही कुछ और है…………न गम अपनो का.ना लिहाज रहा.इंसान खोखला हो रहा अब बात ही कुछ और है………..देशभक्ती रह गयी अब बस नाम की बात है..क्लबो मे नाचते नशे मे वो लोग अब बात ही कुछ और है………. …सर्द ठंडी हवाओ का समय अब कहा…..इमारते ऊची बन रही..मानवता रह गयी छोटी अब बात ही कुछ और है…………..सर्मिनदंगी महसूस होती देख हालाते वतन..अब कौन आएगा भला अवतार होकर के यहॉ..अपने ही लूट रहे अपनो को अब बात ही कुछ और है…..अब बात ही कुछऔर है..

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