कविता · Reading time: 1 minute

हारना नहीं सीखा

चखे हैं जीवन के स्वाद सभी
कोई फीका है कोई तीखा

सबके मेल से बनता अनुभव
मोल है बहुत सभी का

अनुभव से ही सीखा ना मिले जीत हरदम
हमेशा रहे ना नसीब चमकता किसी का

दोस्तों

हार कर सीखा है मैंने
पर हारना नहीं सीखा

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