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हायकू

अल्पना नागर

अल्पना नागर

हाइकु

February 18, 2017

हायकू
(1)
कभी रुके न
समय मुसाफ़िर
चलते जाना
(2)
सूखे गुलाब
जीवन की साँझ में
हरा बसंत
(3)
सम्बन्ध घास
अहंकार की आग
अंततः खाक
(4)
रूठना तेरा
वसंत समय का
शिशिर होना
(5)
आजकल वो
लबालब भरे हैं
खालीपन से
(6)
कोरा कागज़
पढ़ लो जरा तुम
भाव के मोती
(7)
तुम्हारा जाना
घड़ी की टिक टिक
ठहरा वक्त
(8)
शीत ऋतु में
मुट्ठी भर धूप सी
उजली यादें

अल्पना नागर

Author
अल्पना नागर
मेरा नाम अल्पना नागर है।पेशे से शिक्षिका हूँ।मूलतः राजस्थान से हूँ, वर्तमान में दिल्ली में निवास है।पिछले 1 वर्ष से साहित्य सृजन में संलग्न हूँ।सभी तरह की कविताएं छंद मुक्त,छंद बद्ध, गीत,नवगीत,ग़ज़ल, गीतिका,हायकू,क्षणिकाएं लिखना व पढ़ना बहुत पसंद है।
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