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हाथ तेरा चाहती हूँ छोड़ना मैं भी नहीं

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

November 15, 2017

हाथ तेरा चाहती हूँ छोड़ना मैं भी नहीं
पर मिटा सकती हूँ किस्मत का लिखा मैं भी नहीं

दर्द इक दूजे का हर लेते हैं हम दोनों यहाँ
जबकि चारागर नहीं तुम औ दवा मैं भी नहीं

दांव कोई सा भी हो पर सोच कर ही खेलना
तू अगर पाषाण है तो आइना मैं भी नहीं

कर ज़माने को लिया मासूम बन अपनी तरफ
पर समझ लो पाऊंगी कोई सजा मैं भी नहीं

है पता मुझको जला देंगे किसी का आशियाँ
बुझते शोलों को तभी देती हवा मैं भी नहीं

आस्था विश्वास रखती पूरा हूँ भगवान में
रात दिन करती भले ही ‘अर्चना’ मैं भी नहीं
डॉ अर्चना गुप्ता
15-11-2017

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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