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हाईकु एकादश

Rajendra jain

Rajendra jain

हाइकु

February 27, 2017

संसार के सर्वोच्च योगी वीतरागी दिगम्बर संतो के चरणों मे कोटि कोटि नमन करते हुए प्रस्तुत है उनकी महिमा मे इस लघु कवि का अल्प प्रयास सादर…

हाईकु-एकादश

दिगम्बर है
निर्मोही मुनी जन
बालकवत

दिगम्बर हैं
वीतरागी तपस्वी
हितोपदेशी

दिगम्बर हैं
परमशांत मुद्रा
ध्यान करिये

दिगम्बर हैं
प्राकृतिक जीवन
विशुध्दतम

दिगम्बर हैं
निजरूप लखिये
मुक्ति मिलेगी

दिगम्बर हैं
सबकुछ तजे जो
निज मे रमे

दिगम्बर हैं
कर पात्री बनें जो
मोक्ष यात्री वो

दिगम्बर हैं
परम वीतरागी
अध्यात्म योगी

दिगम्बर है
मौन भी रखें नित
मुनि अर्थ मे
१०
दिगम्बर हैं
जो कुछ करें बस
परमार्थ मे
११
दिगम्बर हैं
त्रय लोक भजता
प्रभु रुप मे

राजेन्द्र ‘अनेकांत’
बालाघाट दि.२७-०२-१७

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Author
Rajendra jain
प्रकृति, पर्यावरण, जीव दया, सामाजिक चेतना,खेती और कृषक की व्यथा आदि विषयों पर दोहा, कुंडलिया,चोपाई,हाईकु आदि छंद बद्ध तथा छंद मुक्त रचना धर्मिता मे किंचित सहभागिता.....

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