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हाईकु-एकादश

Rajendra jain

Rajendra jain

हाइकु

February 20, 2017

हालातों की जब भी बात हुई किसान की हालत किसी से छिपी नही है इतिहास बताता है विदेशियों के आने के पूर्व यहाँ सभी कुछ समृद्ध था मगर जो कुछ हुआ इतिहास गवाह है इन्ही भावों को हमने संक्षिप्त विधा हाईकु मे कहने का प्रयास किया है देखिएगा……

हाईकु-एकादश

हालात देखें
भारतीय किसान
कैसे रहता

विदेशी पूर्व
इतिहास ठीक था
बाद बिगड़ा

हमारे देश
जमीनदार नही
ईमानदार

जमीनदारी
विदेशियों की नीति
लूटमार की

कृषि उत्पाद
पशु पालन आदि
आज वेहाल

जीवन देता
अन्नदाता किसान
हम क्या देते

अव मूल्यन
कृषि घाटे का सौदा
प्रगति कैसे

उत्तम किस्म
उत्पाद बड़ाईए
निर्यात हेतु

अधिक मिले
सरकारी बजट
कृषि के लिए
१०
अपना देश
ऋषि कृषि संस्कृति
क्लेश न लेश
११
सच मानिए
कृषक से जीवन
वरना जड़

राजेन्द्र’अनेकांत’
बालाघाट दि.२०-०२-१७

Author
Rajendra jain
प्रकृति, पर्यावरण, जीव दया, सामाजिक चेतना,खेती और कृषक की व्यथा आदि विषयों पर दोहा, कुंडलिया,चोपाई,हाईकु आदि छंद बद्ध तथा छंद मुक्त रचना धर्मिता मे किंचित सहभागिता.....
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