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हाईकु अष्टक

Rajendra jain

Rajendra jain

हाइकु

February 14, 2017

आज के दिन पर देखिए हमारे हाईकु कुछ इस तरह

हाईकु-अष्टक

प्रेम ही पूजा
प्रेम के लिए लिखें
प्रेम समझ

प्रेम जब ही
प्रकृति के रँग मे
रंगें तब ही

सभी दिन हैं
शुभ दिन कोई न
प्रेम बिन है

उनकी रीत
वेलेंटाईन दिन
उनकी प्रीत

प्रेम की रीत
जनम जनम की
हमारी प्रीत

फूहड़ता है
वेलेंटाईन दिन
आज जो यहाँ

खुद को भूल
प्रेम की नकल है
आल जुलूल

हमारे यहाँ
स्थाई प्रेम के रिस्ते
वो और कहाँ

राजेन्द्र’अनेकांत’
बालाघाट दि.१४-०२-१७

Author
Rajendra jain
प्रकृति, पर्यावरण, जीव दया, सामाजिक चेतना,खेती और कृषक की व्यथा आदि विषयों पर दोहा, कुंडलिया,चोपाई,हाईकु आदि छंद बद्ध तथा छंद मुक्त रचना धर्मिता मे किंचित सहभागिता.....
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