हाइकु -4 | मोहित नेगी मुंतज़िर

मां का आँचल
बहती सरिता का
शीतल जल।

रक्षाबंधन
प्यार के धागों पर
आया जीवन।

अपना घर
सपना गरीब का
आंखों पर।

स्वागत तेरा
हिमवंत देश में
गॉंव है मेरा।

खूब सुहाती
गर्मी के मौसम में
पिंडर घाटी।

1 Comment · 5 Views
मोहित नेगी मुंतज़िर एक कवि, शायर तथा लेखक हैं यह हिन्दी तथा उर्दू के साथ...
You may also like: