हाइकु · Reading time: 1 minute

हाइकु

गुलमोहर
सम्मुख बेअसर
ताप प्रखर ।

माटी की बात
खोलने लगी माटी
अंतः जज्बात ।

माँ की ममता
प्रेम घट छलका
जग महका ।

चिड़िया आई
दाने की लालच रे~
वो फँस गई ।

बेटी विदाई
रोक सका न बाप
निज रुलाई ।

वेदना छाई
पीड़ा की परछाई
प्रीत निभाई ।

मौन की भाषा
संवादों पर भारी
कलम हारी ।

नारी पीड़ित
भावभीनी कलम
अश्रु पूरित ।

आँगन खुश
चहकेगी गोरैया
रखें सकोरा ।

देख सकोरा
लौट आई वापस
खुश गोरैया ।

नीड़ बनाने
निकली है गोरैया
रोटी कमाने ।

□ प्रदीप कुमार दाश “दीपक”
साँकरा, रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
मो.नं. 7828104111

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