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हाइकु -१ | मोहित नेगी मुंतज़िर

Apr 11, 2020 12:35 PM

बेपरवाह है
फिरता दर दर
रमता जोगी।

चलते जाओ
यही तो है जीवन
नदिया बोली

जनता से ही
करता है सिस्टम
आंखमिचोली।

घूमो जाकर
किसी ठेठ गांव में
भारत ढूँढ़ो।

लक्ष्य है पाना
तुम एक बनाओ
दिन रात को।

कुछ कर लो
सौभाग्य से है मिला
मानव तन ।

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Mohit Negi Muntazir
Mohit Negi Muntazir
Rudraprayag, Uttrakhand
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मोहित नेगी मुंतज़िर एक कवि, शायर तथा लेखक हैं यह हिन्दी तथा उर्दू के साथ...
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