हाइकु · Reading time: 4 minutes

हाइकु शतक (हाइकु संग्रह)

हाइकु शतक
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1.
चुप रहना
कुछ मत कहना
कर दिखाना।
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2.
अकेला तू ही
बदलेगा दुनिया
शुरु तो कर।
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3.
शिक्षा जरूरी
जीवन-संग्राम में
डिग्री नहीं।
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4.
सब संभव
कुछ न असंभव
करके देख।
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5.
प्रतिभा कभी
मोहताज न रही
परिवेश की।
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6.
यथार्थ में है
वास्तविक योग्यता
ढोंग में नहीं।
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7.
असफलता
सफलता की कुंजी
प्रयास कर।
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8.
वादविहीन
सबसे बड़ा वाद
आतंकवाद।
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9.
सब संभव
कुछ न असंभव
करके देख।
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10.
धीरज धर
मिलेगी कामयाबी
कोशिश कर।
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11.
सच्चा प्रयास
फलता है जरूर
देर सबेर।
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12.
सोना ही खोना
जागना ही है पाना
ऐसा मानना।
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13.
निरक्षरता
सामाजिक कलंक
मिटाएँ इसे।
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14.
अक्षर-दीप
मिटाता अंधकार
जलाओ इसे।
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15.
नशे की लत
बड़ी खतरनाक
बचें इससे।
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16.
नशा करके
वाहन जो चलावे
मौत बुलावे।
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17.
तेज रफ्तार
हरपल खतरा
चलिए धीरे।
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18.
अभी वक्त है
धरती को बचा लो
पेड़ लगा लो।
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19.
आज की नारी
रही नहीं अबला
युग बदला।
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20.
दहेज-प्रथा
सामाजिक कलंक
मिटाएँ इसे।
———
21.
गरीब लोग
दिखावा अमीरी का
खतरनाक।
———
22.
गाँवों का देश
बदहाल ग्रामीण
सुखी शहरी।
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23.
प्रेम की भाषा
सुनता है बहरा
देखता अंधा।
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24.
सहानुभूति
सार्वभौमिक भाषा
पशु भी बुझे।
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25.
रिश्वत देना
रिश्वत लेने से भी
अधिक बुरा।
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26.
पौधा बाँस का
ग्राफ महंगाई का
बढ़े एक-सा
———
27.
नहीं चुकता
जीवन देकर भी
राखी का मोल।
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28.
अपना मरे
स्वर्गवास, दूजे के
देहावसान।
———
29.
बदहजमी
हो ही नहीं सकता
मंत्री को कभी।
———
30.
छोटे पड़ते
बहुतेरे गलती
पैसों के आगे।
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31.
अमीर देश
गरीब है जनता
विचारणीय।
——
32.
भोग के लिए
होती नहीं है सत्ता
सेवा के लिए।
——
33.
दृढ़ निश्चयी
कार्य के मय कभी
रुकते नहीं।
——
34.
मन को जीता
वही सच्चा विजेता
बाकी नाम का।
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35.
विकल्प कोई
कड़ी मेहनत का
होता ही नहीं।
——-
36.
क्षमा करना
दूसरों को सदैव
खुद को नहीं।
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37.
मत सोचना
फल के विषय में
करते जाना।
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38.
गुणों की स्तुति
सिर्फ करना नहीं
अपनाना भी।
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39.
कंजूसी नहीं
गुणों की प्रशंसा में
करना तुम।
——–
40.
दोस्ती बढ़ाती
सम्पन्नता, विपदा
उन्हें परखती।
——–
41.
वह भिखारी
अशीषता है ज्यादा
पाता है कम।
——
42.
फर्क करना
बुद्धिमता का काम
अच्छा व बुरा।
——
43.
लाख छिपा ले
छिपेगा नहीं कभी
सच्चाई यहाँ।
——–
44.
हवा का रूख
मुड़ता है उधर
दम जिार।
——
45.
पैसा पसीना
गरीब का, अमीर
हाथ का मैला।
——-
46.
लोग अपने
लगते हैं बेगाने
बेगाने सगे।
——
47.
कभी न करें
दो नाव की सवारी
भूल कर भी।
——
48.
छोटा कदम
कराता है प्रारंभ
लम्बी यात्रा का।
——-
49.
हो न पाएगी
कलम पर हावी
ये राजनीति।
——
50.
होती न कभी
कलम मजबूर
चाहे जो भी हो।
——-
51.
मेरा सपना
समृद्ध हिंदुस्तान
होगा अपना।
——-
52.
सद्कार्य सदा
पहले असंभव
नजर आता।
——
53.
दृढ़ता से ही
होते महान कार्य
शक्ति से नहीं।
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54.
हर गलती
हमें सबक देती
यदि सीखें तो।
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55.
ईमानदारी
लोक मंगलकारी
मलयानिल।
——
56.
जनता मौन
मतदान करीब
नेता हैरान।
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57.
दहेज प्रथा
नारी का अपमान
बेवजह क्यों ?
——-
58.
आज का नेता
फुटकर विक्रेता
देश बेचता।
——-
59.
आज का सच
आदमी बन गया
आदमखोर।
——-
60.
नया जमाना
संविधान पुराना
कामचलाऊ।
——-
61.
बड़े दरोगा
गाँव के चैकीदार
बिना वरदी।
———
62.
गंगाजल-सा
पवित्र बालमन
अति पावन।
——–
63.
खाते समय
कभी मत बोलिए
स्वस्थ रहिए।
——–
64.
मटका जल
लगता अमृत-सा
फिर फ्रीज क्यों ?
——–
65.
गंगू की बीबी
होती सबकी भाभी.
भोज की, दीदी।
——–
66.
जन्म मरण
बंधा हुआ संसार
बचता कौन।
———
67.
सुबह-शाम
यहाँ काम ही काम
कहाँ आराम ?
———
68.
पहला सुख
होता निरोगी काया
जग जानता।
——–
69.
विरही पत्नी
तलाशती पुलिस
फरार चोर।
——–
70.
ईमानदारी
सिर्फ कागजी शोभा
बात पुरानी।
——–
71.
विलासी नेता
लंगड़ी सरकार
रोती जनता।
———
72.
रूष्ट विपक्ष
बेबस सरकार
तंग जनता।
——–
73.
हासिए पर
हो जाती है जनता
वोट के बाद।
———
74.
कहानी एक
नेता ईमानदार
है असंभव।
———
75.
अफसर से
मंत्री का समझौता
फिफ्टी-फिफ्टी का।
———
76.
अकथ कथा
संविदा की नौकरी
नाटक एक।
———
77.
गांधी का देश
सस्ती हुई शराब
महंगा पानी।
———
78.
क्षणभंगुर
पानी का बुलबुला
मंत्री का वादा।
———
79.
धोबी का कुत्ता
घर का न घाट का
घरजंवाई।
——–
80.
सारे जहाँ की
बातें करती आँखें
बिना बोले ही।
——–
81.
मुस्कुराहट
थकावट मिटाती
प्रिय तुम्हारी।
———
82.
बसंत बन
मेरी जिंदगी में तू
रहना सदा।
——–
83.
बसंत तुम
बरसाओ सर्वत्र
प्रेम माधुर्य।
——-
84.
सूरज-चंदा
हमारे प्यार जैसे
रहेंगे सदा।
——–
85.
पहला प्यार
वश में नहीं मन
सूझे ना कुछ।
——–
86.
दिल में बसी
तसवीर तुम्हारी
झाँक के देख।
———
87.
महक उठा
मन-आँगन मेरा
पाकर तुम्हें।
———
88.
प्रत्येक रिश्ता
कहता एक दास्ताँ
समझो इसे।
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89.
छोटी-सी आशा
लिए जी रहा हूँ मैं
तुम्हें पाने की।
——–
90.
आज की नारी
मर्दों पर है भारी
कल क्या होगा ?
——-
91.
नया संदेश
लेकर आता सूरज
रोज सबेरे।
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92.
जेठ की धूप
अनल उगलता
भ्रष्टाचार-सा।
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93.
निकल पड़ी
सूरज की सवारी
हुआ उजाला।
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94.
अल्पज्ञ नेता
ग्रामीण राजनीति
खतरनाक।
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95.
मूर्ख मानव
वन्य सुअर करें
विष्ठा ग्रहण।
———
96.
आज के बच्चे
मत समझो कच्चे
पर हैं सच्चे।
———
97.
स्कूल हमारे
बच्चों के साथ देश
का भाग्य गढ़ते।
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98.
हँसी खेल में
गुजरे बचपन
करें जतन।
99.
माँ की ममता
पावन गंगाजल
सदा सर्वदा।
100.
हायकुकार
कहलाता पागल
विचित्र बात।

– डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा
रायपुर, छत्तीसगढ़
09827914888
07049590888
09109131207

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