कविता · Reading time: 1 minute

हाइकु नारी ,

हाइकु

नारी ,स्त्री है
कुदरती रचना
सौंदर्य मूर्ति

पुरुष की है
अर्धगाह्नि वसना
प्रेमीतुल्यनी

लगाती ऐसी
माथे पर सिंदूर
तुल्य रंजनी

दुष्टों का नाश
झांसी की रानी बनी
है वीरांगनी ।

प्रेम रसिया
कृष्ण की दुलारी है
मीराबाईनी।

चितौड़गढ़
यह जोहर बना
पद्मावतीनी।

✍पी एस ताल

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