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हाइकु : जर्जर काया

Anju Gupta

Anju Gupta

हाइकु

February 13, 2017

हाइकु

जर्जर काया,
इच्छाएँ खंडहर,
जीने को मरे

नम नयन,
गालों के सूखे आँसू,
पुकारें तुम्हें !

छायी बदरी,
व्याकुल फिर मन,
गीला तकिया !

लकीरें मेरी,
हैं विधाता ने लिखीं,
बदलूंगी मैं !

अंजु गुप्ता

Author
Anju Gupta
Am a management professional with 20 years of rich experience. Working as a softskill Trainer Writing is my passion.