हाइकु : गर्मी/ग्रीष्म/लू/धूप/तपन/घाम

प्रदीप कुमार दाश “दीपक”
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गर्मी/ग्रीष्म कालीन हाइकु

01. करारी धूप
कड़कने लगी है
री! गर्मी आई ।
☆☆☆
02. धूप से धरा
दरकने लगी है
बढ़ी जो ताप ।
☆☆☆
03. गर्मी प्रखर
खिला गुलमोहर
प्रेम असर ।
☆☆☆
04. धूप की आँच
देता अमलतास
पंथी को छाँह ।
☆☆☆
05. मन गुलाब
झुलसती धूप ने
जलाये ख़्वाब ।
☆☆☆
06. रवि धधका
धूप में तप कर
झुलसी धरा ।
☆☆☆
07. सूर्य की आग
ग्रीष्म की प्रखरता
बढ़े संताप ।
☆☆☆
08. जेठ-बैशाख
जल की पूजा करें
शीतल ख़्वाब ।
☆☆☆
09. जल मधुर
गर्मी में तरबूज
शीतल कूप ।
☆☆☆
10. लू की तपन
झुलस रही धरा
चाह सावन ।
☆☆☆☆
□ -प्रदीप कुमार दाश “दीपक”
मो.नं. 7828104111

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