हाँ हम तुम्हें कैसे भुला पायेंगे

ऐ मो० रफी तुमको न भुला पायेंगे
तमाम उम्र यूँ ही याद किए जायेंगे
हाँ हम तुम्हें कैसे भुला पायेंगे
हाँ हम तुम्हें कैसे भुला पायेंगे
वो गजल गीत भजन वो नगमें
तुमने जो गाये डूबकर दिलसे
तेरी आवाज मेंं पिरोये हुये
फिर वो सरगम कहाँ से लायेंगे
हाँ हम तुम्हें कैसे भूला पायेंगे
प्यार में भीगी हुई रूमानी अदा
दर्द में डूबी हुई रुहानी सदा
वाह क्या खूब था अंंदाज-ए-बयां
वाह क्या खूब था अंंदाज-ए-बयां
तुमसा गंधर्व कहाँ से लायेंगे
हाँ हम तुम्हें कैसे भूला पायेंगे
फनो-हुनर की बात करें कि शख्सियत की बात करें
सादादिली की बात करें कि इंसानियत की बात करें
तू ही बता तेरी किस किस अदा की बात करें
जमीं पे फरिस्तों सी तबीयत कहाँ से लायेंगे
हाँ हम तुम्हें कैसे भुला पायेंगे
हाँ हम तुम्हें कैसे भुला पायेंगे

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