“हाँ मैनें देखा है “

सत्य को हारते देखाहै,
दर्द को जीतते देखा है,
वक्त को बदलते देखाहै,
सम्मान का समर्पण देखाहै ,
रंग बदले गिरगिट देखा है,
हाँ!मैने छल- कपट देखा है,
देखा है सम्मान को रेंगते हुए,
अपमान पर अट्टाहास करते,
शिक्षा की अशिक्षा से पराजय,
देखा है मैने ज्ञान को मुखरित-
अज्ञान से हारते और बिलखते,
हाँ! मैने गुरुर को जीतते देखा है|
…निधि…

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"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको" View full profile
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