कविता · Reading time: 1 minute

” हसीन जुल्फें “

मेरे पिया बिन तेरे इस जहाँ में जी न पाएंगे,
काँटों से भरी राह के बीच चल नहीं पाएंगे I

तेरी मोहब्बत मुझे किस मुकाम पर ले आई है?
“ जहां ” पर हर तरफ बस तेरी ही परछाई है ,
एक नज़र की खातिर अभागन तेरे दर आई है,
देख लो एक निगाह बड़ी आस से यह आई है I

मेरे पिया बिन तेरे इस जहाँ में जी न पाएंगे,
काँटों से भरी राह के बीच चल नहीं पाएंगे I

“पिया” प्यार का सागर है तू मेरी भी प्यास बुझा दे ,
अपना कहकर अपने कदमों में थोड़ी सी जगह दे दे,
“ इंसानियत का नगीना ” मेरे हाथों में भी पहना दे,
“ प्यार की बिंदिया ” बनाकर मेरे माथे पर लगा दे I

मेरे पिया बिन तेरे इस जहाँ में जी न पाएंगे,
काँटों से भरी राह के बीच चल नहीं पाएंगे I

अपनी सुंदर,हसीन जुल्फों का एक बार दीदार करा दे ,
दुखियारी को अपनी बेमिसाल सूरत से रूबरू करा दे ,
जहाँ में रहता है तू वो मूरत “ राज ” को भी दिखा दे ,
हर दिल की धड़कन है तू,मुझे भी ऐसी नज़र दिखा दे I

मेरे पिया बिन तेरे इस जहाँ में जी न पाएंगे,
काँटों से भरी राह के बीच चल नहीं पाएंगे I

देशराज “राज”

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