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हवा हूँ मैं !

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

कविता

July 18, 2017

मेरे अंदाज ही कुछ अलग हैं
आज यहाँ, कल वहाँ- – –
पता नहीं
फिर कहाँ हूँ मैं!
हवा हूँ मैं!
कभी पेड़ों पर झूमती नाचतीगाती- – –
खुशियाँ बिखेरती,सबके दर्द की दवा हूँ मैं!
और रुख जो बदल गया, सुनामी हूँ
समझो कोई बात है ,खफा हूँ मैं !
मौत की या फिर उम्र की फिक्र नहीं
जब चाहूँ बच्चा—हर पल जवाँ हूँ मैं – – –
हवा हूँ मैं ।

Author
मुकेश कुमार बड़गैयाँ
I am mukesh kumarBadgaiyan ;a teacher of language . I consider myself a student & would remain a student throughout my life.
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