Skip to content

उड़ो मत हवा में

Rita Yadav

Rita Yadav

कविता

June 23, 2017

उड़ते हुए कब किसी ने,
सारी जिंदगी गुजारी है l
उड़ती है पतंग आसमां में,
पर घड़ी दो घड़ी के लिए l

होती है,एक दूजे में होड़,
कौन किसे काट जाए,
कटी पहले जो गिरी धरा पर,
काटी जो भी न बच पाई l

आसमां में उड़े पखेरू,
उड़ते फिरे खुले गगन में,
मस्त होकर विचरण करें जितना,
पर आसमां में ठौर न पाए l

दरख़्तों पर आकर ही,
मन में चैन वो पावे l
प्यास बुझावे ताल तलैया,
दाना खेत खलिहान में पावे l

पैर जमाए रखो जमीन पर,
विचार आसमान छू जाए,
सादगी का हाथ थाम लो,
कभी न मादकता आएl

Share this:
Author
Rita Yadav

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you