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हवा: पाँच हाइकु

दिनेश एल०

दिनेश एल० "जैहिंद"

हाइकु

November 13, 2017

हवा: पाँच हाइकु
// दिनेश एल० “जैहिंद”

क्षिति, पावक,
जल, नभ, समीरा
लोक मिश्रण ।

पाकर वायु
बढ़ती जंतु आयु
है हवा प्राण ।

द्रव स्वरूप
वात का एक रूप
मीन संसार ।

ज्यों आक्सीजन
है धरा पे जीवन
पृथ्वी निर्जन ।

हवा हवाई
है उत्तम दवाई
सुनो रे भाई ।

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दिनेश एल० “जैहिंद”
15. 07. 2017

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Author
दिनेश एल०
मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का... Read more
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